हरियाणा-इकलौते भाई के संस्कार से बहन का इनकार,VIDEO:आश्रम संचालक से हाथ जोड़कर बोलीं- टाइम नहीं, तुसी ही करा दो, मेहरबानी होवेगी; अस्थियां भी नहीं ली

संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे। हांजी, हांजी… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी। मेरे पास समा है नी। मैं रुक नहीं सकदी। जे मैं आप ठीक होंदी , ते रुक जांदी। ये बातचीत हो रही है दिल्ली के उत्तम नगर की रहने वाली पुष्पा रानी और बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह के बीच। हिंदी भाषा में कहे तो पुष्पा बाबा फरीद से कह रही है कि “आप ही कर दो संस्कार, आपकी बहुत मेहरबानी होगी। मेरे पास समय नहीं है। मैं रुक नहीं सकती। अगर मैं खुद ठीक होती, तो रुक जाती।” मामला है पुष्पा के इकलौते बड़े भाई जुगल किशोर (71) के अंतिम संस्कार का, जिनका शव कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में पड़ा था। बाबा निशान सिंह ने पुष्पा को अंतिम संस्कार के लिए बुलाया था। पहले तो वह बड़ी मुश्किल से आने को राजी हुई, लेकिन आने के कुछ देर बाद ही भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़कर रिश्तेदार के साथ चली गई। इसके बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने ही जुगल किशोर का अंतिम संस्कार किया। अस्थि विसर्जन भी आश्रम की ओर से सरस्वती नदी में किया गया। बाबा निशान का कहना था कि बहन-भाई के ऐसे रिश्ते को देख बेहद दुख हुआ। दिल्ली निवासी जुगल किशोर के अंतिम संस्कार के PHOTO आश्रम संचालक की जुबानी, इस भाई-बहन के रिश्ते की पूरी कहानी… अस्थियां विसर्जित करने के लिए कहा तो हाथ जोड़ लिए बाबा निशान सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना करने पर उन्होंने पुष्पा से पूछा कि अस्थियां तो आपकों ही विसर्जित करनी होगी। इस पर पुष्पा ने हाथ जोड़ लिए। कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए वह न तो अंतिम संस्कार में शामिल हो सकती है और न ही अस्थियां विसर्जित कर सकती है। यह सबकुछ आप ही कर देना, आपकी मेहरबानी होगी। बहन शव छोड़ गई, आश्रम कमेटी ने किया अंतिम संस्कार बाबा निशान सिंह के मुताबिक, इतना कहने के बाद पुष्पा अपने एक रिश्तेदार के साथ वहां से चली गई। उसने भाई के अंतिम दर्शन तक नहीं किए। यह देख उन्हें बेहद दुख हुआ। इसके बाद उन्होंने आश्रम कमेटी से बात की और जुगल किशोर के शव को पिहोवा लाकर उसका अंतिम संस्कार किया। मंगलवार को संस्कार के बाद अस्थियां को सरस्वती में प्रवाहित किया गया तो यह वीडियो सामने आए, जिन्हें देखकर कोई कह रहा है कि अब सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को कोई मूल्य नहीं रह गया है। इकलौते भाई के लिए पुष्पा का यह कदम पूरी तरह अनुचित है। 30 से ज्यादा बेघर रह रहे आश्रम बाबा निशान सिंह ने बताया कि उनके आश्रम में 30 से ज्यादा बेघर लोग रह रहे हैं। इसमें बच्चे, दिव्यांग, बुजुर्ग और बीमार लोग शामिल हैं। अभी आश्रम का निर्माण चल रहा है। इन लोगों की सेवा में उनका बेटा हरिंद्र पाल और पुत्रवधू मदद करते हैं। साथ ही लखविंद्र सिंह ने 2 कनाल जमीन दी थी। अब उनका बेटा अर्शदीप सिंह अमेरिका से मदद भेज रहा है। सोनीपत में टीचर बेटियों ने वीडियो कॉल पर कराया था पिता का अंतिम संस्कार हरियाणा में पारिवारिक रिश्तों के कमजोर पड़ते बंधन का यह पहला मामला नहीं है। करीब एक माह पहले सोनीपत आश्रम में दम तोड़ने वाले मुंबई के कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता (74) केस में भी ऐसा ही देखने को मिला था। उनकी तीन टीचर बेटियों ने भी अंतिम संस्कार में आने से मना कर दिया था। ऑनलाइन 5100 रुपए भेजकर वीडियो कॉल पर ही अंतिम संस्कार कराया था। जब चिता को अग्नि दी जा रही थी, तब बेटी ने पूछा था कि “अभी और कितना टाइम लगेगा?” इस पर उसे बताया गया कि मुखाग्नि दी जा चुकी है और 10-15 मिनट में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद बेटी ने कहा था कि “सारा काम अच्छे से हो गया ना, मुझे सारी वीडियो भेज देना।” ——————– ये खबर भी पढ़ें… हरियाणा- व्यापारी पिता का VIDEO कॉल से कराया अंतिम संस्कार:अस्थियां लेने भी नहीं पहुंचीं टीचर बेटियां, ₹5100 भेजकर बोलीं-सारा काम अच्छे से करा देना मुंबई में बड़े कपड़ा व्यापारी रहे शिवचरण रामरत्न गुप्ता (74) की हरियाणा के सोनीपत स्थित एक वृद्धाश्रम में मौत हो गई। वे पिछले तीन साल से आश्रम में रह रहे थे। दो साल पहले उनकी पत्नी का भी इसी आश्रम में निधन हुआ था। मंगलवार को आश्रम प्रबंधन ने उनकी मौत की सूचना उनकी तीनों टीचर बेटियों को दी। (पूरी खबर पढ़ें)

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