दिल्ली के मालवीय नगर में फ्लरिश होटल में लगी आग में गुरुग्राम के चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल की परिवार व रिश्तेदारों के 8 सदस्यों समेत मौत होने की जानकारी है। विवेक के दामाद प्रेम बंसल ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में इसकी पुष्टि की।
विवेक अग्रवाल के पिता दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती हैं और वेंटिलेटर पर बताए जाते हैं। मंगलवार को विवेक अग्रवाल मां, पत्नी, दो बेटियों संग अस्पताल गए थे। साथ में मामा, मौसी व मौसा भी थे। ससुर प्रेम बंसल ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया कि उनके बेटी-दामाद समेत सभी 8 जने होटल में थे। ये लोग होटल के रेस्टोरेंट में ब्रेकफास्ट कर रहे थे। सुबह करीब 9 बजे आग लगी। सभी झुलस गए और उनकी मौत हो गई। दूसरी तरफ, इस आगजनी में आधिकारिक तौर पर 21 लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। इनमें से 17 के विदेशी मूल के होने की जानकारी सामने आ रही है। शव बुरी तरह से झुलस गए हैं और पहचान के लिए DNA टेस्ट किया जा रहा है। रेस्टोरेंट के ऊपर होटल था, आग 6 मंजिल तक पहुंची आग 6 मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने बी-एन-बी रेस्टोरेंट में लगी। कुछ देर बाद होटल में ऊपर की तरफ फैल गई। यह होटल दिल्ली के प्रेस एन्क्लेव रोड पर है। यहीं पर मैक्स हॉस्पिटल और AIIMS भी है। बताया जा रहा है कि इन अस्पतालों में इलाज कराने आने वालों के परिजन भी इस होटल में रुका करते थे। मामाजी किशनगंज से और मौसा-मौसी अजमेर से आए थे विवेक अग्रवाल गुरुग्राम के सेक्टर-46 में रहते थे। विवेक अग्रवाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे। विवेक अग्रवाल के अलावा उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल, बड़ी बेटी एंजल अग्रवाल, छोटी बेटी पर्ल, मामा अशोक गोयल और मौसी कमला भी हादसे का शिकार हुईं। मामाजी किशनगंज से आए थे और मौसा-मौसी अजमेर से आए थे। ससुर बोले- बेटी का फोन आया, तो होटल पहुंचा विवेक के ससुर प्रेम बंसल ने बताया कि बेटी तर्जनी का सुबह 9 बजे फोन आया तो वो उसने बताया कि वो होटल में रूम लेकर रह रहे थे। होटल में सुबह आग लग गई। विवेक के पिता परसों से मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं। पूरा परिवार कल सिर्फ उन्हें देखने हॉस्पिटल गया था। विवेक ने होटल में रूम लिए, बड़ी बेटी दादा को देखने बेंगलुरु से आई मंगलवार को विवेक ने होटल में दो कमरे बुक किए थे और सुबह आग लग गई। उसकी बड़ी बेटी 12वीं करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बेंगलुरु में रहती है और उसे कल ही उसके दादा से मिलने के लिए बुलाया गया था। छोटी बेटी 10वीं क्लास में है। सभी मौतें दम घुटने से हुई बताई जा रही हैं। विवेक ने अपने मामा के बेटे को फोन करके बताया था कि वह बेसमेंट में फंस गया है और बचाने की गुहार लगा रहा था। जब तक उसका भाई कोटला से आया, तब तक पूरा परिवार आग की चपेट में आ चुका था।
स्थानीय महिला बोली- होटल से धमाके की आवाजें आई स्थानीय निवासी अनीता चौधरी ने बताया कि होटल में आग लगने के बाद कई बार धमाका होने की आवाज आई। इसके बाद होटल में चीख-पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूद रहे थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। दूसरे प्रत्यक्षदर्शी संजय गोयल ने बताया कि जैसे ही इमारत से धुआं निकलता दिखा, आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों ने कंबल और रजाइयां जुटाईं तथा खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बनाया। कई लोगों ने पत्थर मारकर खिड़कियों के शीशे तोड़े ताकि अंदर फंसे लोग बाहर निकल सकें। प्रत्यक्षदर्शी विजय जायसवाल ने बताया कि होटल में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक ठहरते थे। आसपास बड़े अस्पताल होने के कारण कई विदेशी इलाज के लिए दिल्ली आते थे और इसी होटल में रुकते थे। बेटे को सीने से चिपकाए तीसरी मंजिल से कूदी मां होटल अग्निकांड में एक मां ने अपने बच्चे की जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग और धुएं के बीच जब बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा, तो महिला ने बच्चे को सीने से चिपकाया और नीचे कूद गई। स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही होटल के नीचे सड़क पर गद्दे बिछा दिए थे। महिला और बच्चा इन्हीं गद्दों पर गिरे, जिससे उनकी जान बच गई। हालांकि महिला को चोटें आईं और दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते गद्दे नहीं बिछाए जाते, तो हादसा और भी भयावह हो सकता था। आग लगने के दौरान कई लोग खिड़कियों से मदद के लिए पुकार रहे थे, जबकि आसपास के लोग अपनी जान की परवाह किए बिना बचाव में जुट गए थे। दिल्ली हादसे के PHOTOS….
