कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक पर सरकार से 3 सवाल किए। उन्होंने पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया था। देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40% यानी ₹19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है। आगे जानेंगे कि गुड़, चावल और मक्के का आटा भी 24% तक महंगा हुआ, लेकिन उससे पहले पढ़िए भास्कर नॉलेज… चीनी का स्टॉक कम होने की 4 बड़ी वजह… 1. मौसम खराब होने से गन्ने से चीनी कम बनी नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के मुताबिक, पिछले साल ज्यादा बारिश से गन्ने ‘की फसल को नुकसान हुआ। इससे गन्ने से चीनी बनने की दर यानी रिकवरी रेट 12% से नीचे आ गया। मतलब 100 किलो गन्ने से 12 किलो से भी कम चीनी बनी। इससे देश का चीनी उत्पादन करीब 3 करोड़ टन रहा, जबकि अनुमान 3.2 करोड़ टन का था 2. गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपा सरकार की नई एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के तहत गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय एथेनॉल बनाने में खप रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, देश में पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज व 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा लगा। इसमें 34 लाख टन गन्ना था। 3. कम स्टॉक के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। फरवरी 2026 में 5 लाख टन की मंजूरी और बढ़ा दी। सरकार ने कीमतें बढ़ने पर मई 2026 में चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगाई, लेकिन तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी। इससे चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन हो गया और घरेलू बाजार में चीनी की कमी हो गई। 4. त्योहारी सीजन के दौरान जमाखोरी गणेश चतुर्थी और दीवाली जैसे त्योहारों के सीजन, यानी अगस्त से नवंबर तक मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई और बेवरेज वगैरह बनाने वाली कंपनियां चीनी स्टॉक करने लगती हैं। ज्यादा डिमांड और स्टॉक कम होने के चलते दाम और बढ़ जाते हैं। तीन महीने में गुड़ के दाम भी 24% तक बढ़े चीनी के अलावा तीन महीने में गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ है। चीनी के दाम बढ़ने की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है। मिलों के पास शुरुआती स्टॉक भी पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास 47 लाख टन चीनी थी, जो इस बार घटकर 32 लाख टन रह गई है। सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से चीनी की कीमत नहीं बढ़ी केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को कहा कि कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है। चोपड़ा के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹48/kg थी, जो बढ़कर ₹56/kg हो गई। वहीं, एक्स-मिल कीमत सिर्फ 7-10 दिनों में ₹47-48 से बढ़कर ₹62/kg पहुंच गई। उन्होंने मिलों की ओर से अचानक दाम बढ़ाने को अनुचित बताया। खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही खाद्य सचिव के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही शुगर से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली शुगर की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए 28 लाख टन शुगर डायवर्ट की गई है। हालांकि, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसमें 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना शामिल था। संगठन के मुताबिक, खराब अनाज की उपलब्धता घटने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड भी 8-10% तक महंगे हुए। भारत ने 9 साल पहले विदेश से चीनी आयात की थी भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की थी, लेकिन इसके बाद निर्यात लगातार घट रहा है। घरेलू सप्लाई पर संकट हो, तो सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी मंगवाती है और उसे घरेलू मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारती है। 9 साल पहले आखिरी बार 2017 में 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब एक दशक बाद फिर विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है। भारत का शुगर उत्पादन भी घटा 2025-26 में देश में चीनी उत्पादन 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन था। रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान हुआ, जिससे उत्पादन घटा। हालांकि, सरकार का कहना है कि सितंबर 2026 के अंत तक 33-35 लाख टन शुगर का स्टॉक बचने का अनुमान है। यानी घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त शुगर उपलब्ध है। अक्टूबर से बढ़ सकती है चीनी की सप्लाई सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी मिलों में पेराई का नया सीजन 15 अक्टूबर के आसपास शुरू हो सकता है। इससे अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए सप्लाई पर्याप्त रहेगी और त्योहारों के दौरान शुगर की कमी नहीं होगी। इसके अलावा, सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है। डीलर्स के लिए 400 टन की सीमा है, जबकि 1 सितंबर से बड़े थोक खरीदार 15 दिन की खपत से ज्यादा शुगर स्टॉक नहीं कर सकेंगे। ————————— यह खबरें बी पढ़ें… 50 दिनों में 19% महंगी क्यों हुई चीनी, क्या और बढ़ेंगे दाम; दुनिया को चीनी बेचने से खरीदने की नौबत कैसे आई पिछले 50 दिनों में चीनी 19% महंगी हो गई है। यह देशभर की सरकारी औसत कीमत है, जबकि कई शहरों में दुकानों पर चीनी 65 से 70 रुपए किलो तक बिक रही है। अब सरकार ने 10 लाख टन चीनी विदेश से आयात करने का फैसला किया है। ऐसे में सवाल है कि ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक भारत अचानक चीनी की कमी में कैसे फंस गया, दाम आगे और बढ़ेंगे या सरकार इन्हें रोक पाएगी। पढ़ें पूरी खबर…
चीनी ₹70 प्रति किलो, खड़गे बोले- ये कैसा आत्मनिर्भर भारत:3 महीने में 40% महंगी हुई; सरकार का बयान- एथेनॉल बनाने से नहीं बढ़े दाम
