दिल्ली में सर्दियों से पहले प्रदूषण पर लगाम की तैयारी:एलजी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक; रियल-टाइम मॉनिटरिंग से तय होगी जवाबदेही

दिल्ली को सांस लेने लायक बनाने की तैयारी में जुटे एलजी टीएस संधू, धूल से धुएं तक हर स्रोत पर होगा प्रहार सर्दियों से पहले एक्शन: अब नहीं चलेगी बहानेबाजी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग से तय होगी जवाबदेही; धूल हटाने के लिए मिशन मोड में उतरेंगी सभी एजेंसियां
हर साल सर्दियों के मौसम में गंभीर रूप धारण करने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। राजधानी की हवा को स्वच्छ और सांस लेने लायक बनाने के उद्देश्य से उपराज्यपाल (LG) टीएस संधू ने राजनिवास में ‘कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (CAQM) के चेयरमैन राजेश वर्मा के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के प्रमुख कारणों की समीक्षा करते हुए सर्दियों से पहले ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। एलजी ने दोटूक कहा कि प्रदूषण पूरे क्षेत्र की चुनौती है, इसलिए सभी एजेंसियों को समन्वित और जवाबदेह तरीके से काम करना होगा, लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सड़कों के किनारे गाद छोड़ने वाली एजेंसियों पर होगी सख्ती बैठक में एलजी टीएस संधू ने विशेष रूप से सड़कों की धूल (रोड डस्ट) को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पीएम-10 और पीएम-2.5 के स्तर को बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है, लेकिन इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। एलजी ने निर्देश दिए कि राजधानी की प्रमुख सड़कों को धूल-मुक्त बनाने के लिए मिशन मोड में अभियान चलाया जाए। नालों की सफाई के बाद निकाली गई गाद (कीचड़) को सड़कों के किनारे सूखने के लिए छोड़ने की पुरानी प्रथा पर सख्त नाराजगी जताते हुए एलजी ने संबंधित एजेंसियों को इसका तत्काल निपटान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों की संख्या बढ़ाने और सड़क किनारे ग्रीन बफर विकसित करने पर भी जोर दिया गया। सड़कों की मरम्मत एंड-टू-एंड हो, ताकि कच्ची मिट्टी न दिखे एलजी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “गाड़ियों और फैक्ट्रियों के धुएं को नियंत्रित करने के साथ-साथ सड़कों की धूल को रोकना न केवल अनिवार्य है, बल्कि यह सबसे आसानी से किया जाने वाला काम भी है। इसमें शामिल अधिकांश एजेंसियां हमारे सीधे नियंत्रण में हैं। सड़कों की मरम्मत एंड-टू-एंड होनी चाहिए ताकि कहीं भी कच्ची मिट्टी दिखाई न दे।” उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है और सर्दियों से पहले इसके परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए। ई-बसें बढ़ेंगी और पराली पर पड़ोसी राज्यों से होगा समन्वय प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति में परिवहन और औद्योगिक क्षेत्र को भी केंद्र में रखा गया है। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स: राजधानी में ई-बसों (Electric Buses) का बेड़ा बढ़ाया जाएगा और इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इंडस्ट्रियल मॉनिटरिंग: एनसीआर (NCR) के औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी और तेज की जाएगी। पराली पर लगाम: पराली जलाने जैसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय की रूपरेखा तैयार की गई है। रियल-टाइम ट्रैकिंग से तय होगी जवाबदेही तालमेल पर जोर: एमसीडी (MCD), पीडब्ल्यूडी (PWD), डीडीए (DDA), एनडीएमसी (NDMC) और बाढ़ एवं सिंचाई विभाग सहित सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा। डेटा आधारित मूल्यांकन: प्रदूषण नियंत्रण कार्यों की निगरानी के लिए जल्द ही एक ‘रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम’ लागू किया जाएगा। जवाबदेही तय: इस डिजिटल सिस्टम से यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि किस एजेंसी ने जमीनी स्तर पर कितना काम किया और कहां लापरवाही बरती गई।

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