पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने अपनी किताब ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर’ में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक इमोशनल मोमेंट शेयर किया है। कुरैशी की किताब के मुताबिक 2012 में चुनाव आयोग के खिलाफ कुछ मंत्रियों ने कमेंट किए। जब इनकी शिकायत मनमोहन सिंह की गई तो उन्होंने कहा था, “अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।” मनमोहन सिंह ने कुरैशी से यह भी कहा था कि इलेक्शन कमीशन सिर्फ भारत का गौरव नहीं है, यह देश के लोकतंत्र की आत्मा है और अगर हम इसे खो देते हैं, तो हम सब कुछ खो देंगे। अपनी किताब में कुरैशी ने मनमोहन सिंह की एक ऐसे नेता के रूप में तारीफ की है, जिनके लिए संवैधानिक मर्यादा बातचीत का मुद्दा नहीं बल्कि एक जीता-जागता विश्वास था। किताब के राइटर कुरैशी भारत के 17वें मुख्य चुनाव आयुक्त थे। वे 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक चुनाव आयोग की बागडोर संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने मतदाता जागरूकता, चुनावी खर्च निगरानी और चुनाव प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए। पढ़िए यह पूरा घटनाक्रम क्या था… कुरैशी ने लिखा- यह सीक्रेट नहीं, देश के लीडर के कैरेक्टर की झलक थी इस वाकये का जिक्र करते हुए कुरैशी लिखते हैं- PM सिंह के सुसाइड वाले कमेंट की बात मैंने तुरंत उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी टीकेए नायर और उनके नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर शिवशंकर मेनन को बताई। हरीश ने भी अपने कॉमन दोस्तों को इस बारे में बताया। हममें से किसी ने भी इसे सीक्रेट नहीं माना; यह हमारे देश को लीड करने वाले आदमी के कैरेक्टर की एक बहुत जरूरी झलक थी। किताब में और क्या है… पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने इस किताब में अपनी जिंदगी के 100 दिलचस्प किस्से-कहानियों का संकलन किया है। कुरैशी ने उन घटनाओं, मुश्किलों और अचानक आए घटनाक्रमों के बारे में बताया है, जिन्होंने सिविल सर्विस में उनके करियर को खास बनाया। हैचेट इंडिया द्वारा पब्लिश यह किताब जल्द ही बाजार में आने वाली है। किताब में 2012 में इलेक्शन कमीशन के पंजाब के ड्रग संकट को पकड़ना, वह MoU जिसने डोनाल्ड ट्रम्प और एलन मस्क को हैरान कर दिया और कैसे TRP का इस्तेमाल दूरदर्शन को छोटा करने और उसके विज्ञापन के पैसे को दूसरी जगह लगाने के लिए किया गया… इन घटनाओं का जिक्र है। भारत के 13वें प्रधानमंत्री थे डॉ. मनमोहन सिंह डॉ. मनमोहन सिंह 2 मई 2004 से 26 मई 2014 तक लगातार दो कार्यकाल तक भारत के 13वें प्रधानमंत्री रहे। उन्हें दुनिया के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं में गिना जाता है। वे भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे। वे ऐसे पहले प्रधानमंत्री भी थे जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष और वित्त मंत्री जैसे पदों पर काम किया था। वे 1991–1996 के दौरान पी. वी. नरसिम्हा राव सरकार में वित्त मंत्री रहे। इसी दौरान भारत में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत हुई। वे लोकसभा का चुनाव कभी नहीं जीते। 1991 से 2024 तक राज्यसभा के सदस्य रहे और अधिकांश समय असम का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार ने उन्हें 1987 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। उनका निधन 26 दिसंबर 2024 को नई दिल्ली में 92 साल की उम्र में हो गया था। ————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव: सीएम शुभेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
Related Posts
जज से बहस वाले वीडियो पर केजरीवाल को नोटिस:हाईकोर्ट ने पूछा- सबसे पहले अपलोड किसने किया; जितने लिंक बचे उन्हें डिलीट करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को पूर्व CM अरविंद…
उत्तराखंड में तैयार हुआ ₹182 करोड़ का ‘जिहादी ड्रग’:50 हजार किराए के लिए सीरियाई नेटवर्क को सौंपी फैक्ट्री, पूरी प्लानिंग से चुना गया देहरादून
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने हाल ही में दिल्ली और गुजरात से पहली बार 182…
दिल्ली की गर्मी से लोगों को मिलेगी राहत:बांस से बने कूलिंग जोन बनेंगे आम आदमी का सहारा; प्राकृतिक वेंटिलेशन-मिस्ट कूलिंग तकनीक से लैस
दिल्ली में पड़ रही चिलचिलाती धूप और हीटवेव से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने…
