नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने बुधवार को संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर गठित संसदीय संयुक्त समिति (जेपीसी) के सदस्यों से विधानसभा परिसर में मुलाकात कर ‘एक राष्ट्र- एक चुनाव’ प्रस्ताव पर अपने सुझाव साझा किए। समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल अध्ययन दौरे के तहत दिल्ली विधानसभा पहुंचा।यह दौरा देशभर में ‘एक राष्ट्र- एक चुनाव’ के प्रस्तावित ढांचे पर चल रहे परामर्श अभियान का हिस्सा है। समिति इस व्यवस्था से जुड़े संवैधानिक, विधिक, प्रशासनिक और निर्वाचन संबंधी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इसके लिए विभिन्न राज्य सरकारों, संवैधानिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जा रहे हैं। अध्ययन के बाद समिति अपनी अनुशंसाएं संसद को सौंपेगी। बार-बार चुनाव से सरकारी खजाने पर पड़ रहा बोझ : विधानसभा अध्यक्ष बैठक के दौरान विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते थे, लेकिन समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियों और विधानसभाओं के समयपूर्व विघटन के कारण चुनावी चक्र अलग-अलग हो गए। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है और प्रशासनिक संसाधनों का भी व्यापक उपयोग होता है। इसके अलावा, बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता के कारण विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार प्रभावित होती है। विधानसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू करनी है तो इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बनाना आवश्यक होगा। साथ ही, ऐसी व्यवस्था को प्रभावी और टिकाऊ बनाने के लिए मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपाय और स्पष्ट कानूनी प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
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