सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी हाईकोर्ट में फैसलों में देरी पर चिंता जताई है। कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, ‘किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित (रिजर्व) रखने के बाद उसे 3 महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए। अगर 3 महीने तक फैसला नहीं आता है, तो हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल उस मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे।’ CJI सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने यह भी कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया जाए। अगर फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर जारी किया जाए और तुरंत वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। कोर्ट ने इस संबंध में 12 निर्देश जारी किए। ये निर्देश झारखंड सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें आरोप था कि हाईकोर्ट ने 2022 से फैसला नहीं सुनाया है। कोर्ट ने 4 साल से पेंडिंग केस के मामले में आदेश दिया यह मामला अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 4 दोषियों की याचिका से जुड़ा है। उनका कहना था कि झारखंड हाईकोर्ट में उनकी क्रिमिनल अपील 2022 से पेंडिंग है, लेकिन अब तक फैसला नहीं सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि फैसले में इतनी देरी संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। इसमें समय पर सुनवाई और न्याय पाने का अधिकार भी शामिल है। इससे पहले नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से रिपोर्ट मांगी थी। इसमें यह बताने को कहा गया था कि किन मामलों में फैसला कब रिजर्व रखा गया, कब सुनाया गया और आदेश वेबसाइट पर कब अपलोड किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को 12 निर्देश दिए CJI ने कहा- 15 साल हाईकोर्ट जज रहा, कभी फैसला रिजर्व नहीं रखा CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाईकोर्ट जज के रूप में 15 साल के कार्यकाल में कभी भी किसी मामले में फैसला सुरक्षित नहीं रखा, न ही तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया। उन्होंने कहा- न्याय की कीमत पर ऐसी देरी को जारी रहने नहीं दिया जा सकता। धारा 142, जिसने सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए भारत के संविधान ने धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को स्पेशल पावर दिए हैं। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट कम्पलीट जस्टिस के लिए स्पेशल ऑर्डर जारी कर सकता है। यानी किसी मामले में सामान्य कानून तुरंत या पूरा न्याय नहीं कर पा रहा हो, तो सुप्रीम कोर्ट अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढ़ने से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया था कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 मामले पेंडिंग थे। ————————— सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग जमानत याचिकाओं को लेकर सुझाव दिए: कहा- हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए ऑटोमैटिक लिस्टिंग सिस्टम बने, तय समय में फैसला हो सुप्रीम कोर्ट ने मई के पहले हफ्ते में देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी। तब कोर्ट ने कहा था कि जमानत मामलों की जल्दी सुनवाई और फैसला करने के लिए मजबूत व्यवस्था बनानी जरूरी है। कोर्ट ने कहा था कि हाईकोर्ट, राज्य सरकारें और जांच एजेंसियां मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार करें, जिससे जमानत मामलों का समय पर फैसला हो सके। पढ़ें पूरी खबर…
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