अब डिजिपिन से होगी हर लोकेशन की डिजिटल पहचान:भारतीय डाक ने लॉन्च किया, पिन कोड की तरह 10 अक्षरों और अंकों का कोड होगा

भारतीय डाक ने देश में जगहों की डिजिटल पहचान के लिए ‘डिजिपिन’ यानी डिजिटल पोस्टल इंडेक्स नंबर शुरू किया है। इसके तहत हर जगह को 10 अक्षरों और अंकों का एक खास कोड मिलेगा। इससे किसी जगह की पहचान मौजूदा 6 अंकों वाले पिन कोड से ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकेगी। खास बात यह है कि डिजिपिन मौजूदा पिन कोड की जगह नहीं लेगा। इसे पुराने पते और पिन कोड के साथ इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसे डाक विभाग ने आईआईटी हैदराबाद और इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के साथ मिलकर तैयार किया है। 6 सवालों के जवाब में समझें, डिजिपिन के बारे में… सवाल 1: क्या डिजिपिन आने के बाद पिन कोड खत्म हो जाएगा?
जवाब: नहीं, डिजिपिन पिन कोड की जगह नहीं लेगा। दोनों का इस्तेमाल साथ किया जा सकेगा। सवाल 2: डिजिपिन से आम आदमी को क्या फायदा होगा?
जवाब: ऐसे पते जहां मकान नंबर, गली या सड़क की जानकारी स्पष्ट नहीं है, वहां सही जगह खोजने में आसानी होगी। गांवों और दूरदराज के इलाकों में भी यह उपयोगी हो सकता है। सवाल 3: इमरजेंसी में डिजिपिन कैसे काम आएगा?
जवाब: एंबुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड या राहत टीमों को किसी जगह की सटीक लोकेशन बताने में मदद मिल सकती है। आपदा के समय यह खास तौर पर उपयोगी हो सकता है। सवाल 4: क्या डिजिपिन के लिए इंटरनेट जरूरी है?
जवाब: नहीं, लोकेशन का डिजिपिन पता चल जाने के बाद इसे ऑफलाइन भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सवाल 5: अपना डिजिपिन कैसे पता करें?
जवाब: डाक विभाग की ‘अपना डिजिपिन जानें’ सुविधा के जरिए अपनी मौजूदा लोकेशन का डिजिपिन पता किया जा सकता है। इसके लिए अकाउंट बनाने या कोई अलग एंट्री करने की जरूरत नहीं है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… मेटा का पर्सनल AI एजेंट लॉन्च, खुद ईमेल भेजेगा,पेमेंट करेगा:ऑनलाइन शॉपिंग-बिजनेस प्लानिंग में भी यूजर्स की मदद करेगा म्यूज मेटा ने मंगलवार को 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए पर्सनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट ‘म्यूज’ लॉन्च किया। यह रोजमर्रा के कामों जैसे शेड्यूल बनाने और खरीदारी में भी मदद करेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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