पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद रविवार को हरियाणा पुलिस ने खनौरी-दाता सिंहवाला बॉर्डर पर किसानों को रोक लिया। बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद किया गया है। भारी पुलिस बल तैनात है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में रविवार को बॉर्डर से दिल्ली के जंतर-मंतर तक ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का ऐलान किया था। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 55 पदयात्री शामिल हैं। संगठन ने 29 अगस्त को दिल्ली में पंचायत का भी ऐलान किया है। रविवार दोपहर डल्लेवाल ने 2024 किसान आंदोलन में शुभकरण सिंह की मौत वाले स्थान से मिट्टी उठाई। इसके बाद किसानों की जींद DC वैशाली शर्मा के साथ दो बार मीटिंग हुई। हालांकि, इसमें कोई हल नहीं निकला। इसके बाद किसानों ने पंजाब की साइड धरना शुरू करने का ऐलान किया। इससे पहले डल्लेवाल ने कहा कि रास्ता किसानों ने नहीं, हरियाणा पुलिस ने रोका है। अगर किसानों को आगे नहीं जाने दिया गया तो वे रातभर यहीं रुकेंगे। इधर, जींद, कैथल और फतेहाबाद में खनौरी बॉर्डर की ओर जा रहे किसानों को पुलिस ने डिटेन किया। बॉर्डर सील और किसानों को डिटेन करने की तस्वीरें… जानिए किसान नेता डल्लेवाल ने क्या कहा… SP बोले- धारा 163 लागू, किसानों को आगे नहीं जाने देंगे जींद SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम जनता को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। दिल्ली कूच करने पहुंचे किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में धारा 163 लागू है, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुरक्षा के मद्देनजर जगह-जगह नाके लगाए गए हैं। कौन थे किसान शुभकरण, जिनकी खनौरी बॉर्डर पर मौत हुई शुभकरण सिंह पंजाब के बठिंडा जिले के बल्लो गांव के युवा किसान थे और 2020-21 के किसान आंदोलन में भी शामिल हुए थे। फरवरी 2024 में MSP की कानूनी गारंटी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों के दिल्ली कूच के दौरान वह 13 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पहुंचे थे। 21 फरवरी को किसानों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के दौरान शुभकरण गंभीर रूप से घायल हुए और पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉट्रम में उनके सिर में धातु के छर्रे मिले थे। उनकी मौत के बाद किसान संगठनों ने इसे आंदोलन के दौरान हुई मौत बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। 28 फरवरी को पंजाब पुलिस ने उनके पिता की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और 29 फरवरी को उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया। शुभकरण की मौत के बाद किसान संगठनों ने उन्हें आंदोलन का शहीद माना और खनौरी बॉर्डर पर उनकी याद में शहीदी स्थल बनाया।
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