दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों ने मंगलवार को राहत की सांस ली, जब केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि 5 जून को क्लब परिसर पर कोई जबरन कब्जा नहीं लिया जाएगा, जिससे 113 साल पुरानी संस्था पर निर्भर पूर्व सैनिकों और कर्मचारियों के बीच आशंकाएं कम हो गईं। यह आश्वासन तब आया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया लुटियंस दिल्ली में स्थित क्लब के खिलाफ कोई भी बेदखली की कार्यवाही कानून के अनुसार ही की जाएगी और केवल कब्जेदारों को उचित नोटिस देने के बाद ही की जाएगी। न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष दलीलें पेश किए जाने के बाद, क्लब के कई सदस्यों ने इस घटनाक्रम को एक बड़ी राहत बताया और कहा कि केंद्र के 22 मई के उस आदेश के बाद व्यापक चिंता का माहौल था जिसमें क्लब को कुछ ही दिनों के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया था। दोनों पक्षों में हुई जोरदार बहस….
क्लब को खाली कराने के मुद्दे पर कोर्ट में अभिषेक मनु सिंघवी और तुषार मेहता के बीच खूब जोरदार बहस बहस हुई। कोर्ट ने क्लब ने केंद्र सरकार की ओर से परिसर खाली करने के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए इस मामले में 8 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के नोटिस पर कोई भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। सिंघवी ने कोर्ट को बताया केंद्र सरकार की तरफ नियुक्त समिति के कारण क्लब के मौजूदा ढांचे और अधिकारों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा जिस पक्ष को आज याचिकाकर्ता होना चाहिए था, उसे प्रतिवादी बना दिया गया है। दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है, इसकी सदस्य सूची में पूर्व प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ नौकरशाह, सेना के अधिकारी, जज और बड़े उद्योगपति शामिल रहे हैं। अब इस मामले में सभी की नजर हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
