बेटे सार्थक का 34वां जन्मदिन मनाना था, लेकिन उसकी शोकसभा मना रहे हैं। काले रंग की थार ने उसे टक्कर मार दी। हमने बेटे को बहुत महंगा हेलमेट लेकर दिया था। कोई ये नहीं कह सकता कि उसने हेलमेट नहीं पहना था। उसके हेलमेट पर काफी स्क्रैच हैं। हेलमेट उसकी जान नहीं बचा पाया। गुरुग्राम के रिजवुड सोसाइटी में रहने वाले सुरेंद्र मट्टू ने रोते हुए यह बात कही। उनके इकलौते बेटे सार्थक मट्टू एक कंपनी में इवेंट मैनेजर थे। 25 जून की सुबह ऑफिस के काम से नोएडा जाते हुए दिल्ली में एक काले रंग की थार गाड़ी की टक्कर में सार्थक की मौत हो गई थी। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुरेंद्र ने आरोप लगाया कि थार ड्राइवर ने पहले बेटे की बाइक को टक्कर मारी और फिर उसके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद सार्थक की जान बच सकती थी। थार बेंगलुरु की कंपनी के नाम रजिस्टर्ड दिल्ली पुलिस ने सार्थक के एक्सीडेंट मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि हादसे में शामिल थार बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। कंपनी ने यह गाड़ी बिहार निवासी सागर साहा को लीज पर दे रखी थी, जो बेंगलुरु में ही तैनात है। पूछताछ में सागर ने पुलिस को बताया कि हादसे के समय गाड़ी उसका दोस्त अपूर्व सिंह चला रहा था। अपूर्व सिंह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला है और गुरुग्राम की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता है। जानिए सार्थक के पिता ने क्या कहा…. पहले टक्कर मारी, फिर गाड़ी चढ़ाई सार्थक मट्टू के पिता सुरेंद्र ने बताया, “दिल्ली के रजोकरी फ्लाईओवर पर एक थार ने कट मारते हुए सार्थक की बाइक को टक्कर मारी और उसके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। इसके बाद उसे सड़क पर ही छोड़ दिया। मेरा बेटा आज मेरे पास नहीं है। मैं पुलिस अधिकारियों और मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बेटे के जाने के बाद उसकी मां अधमरी जैसी हालत में है।” 40 घंटे बाद एल्कोहल टेस्ट कराया सुरेंद्र ने आरोप लगाया, “ पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हमें पता चला कि पुलिस ने हादसे के करीब 40 घंटे बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आरोपियों का एल्कोहल टेस्ट कराया। अब इतने समय बाद जांच में क्या ही एल्कोहल मिलेगा। यह हिट एंड रन नहीं, बल्कि मर्डर है।” समय पर अस्पताल पहुंचता तो बच जाता उन्होंने कहा, “सभी कहते हैं कि सड़क हादसे के बाद शुरुआती एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ होता है। घटनास्थल से अस्पताल महज 10 मिनट की दूरी पर था। अगर सार्थक को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता, तो शायद उसकी जान बच जाती। पुलिस पहुंचने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। जब हम वहां पहुंचे, तो हमें बताया गया कि सार्थक अब नहीं रहा। हादसे के बाद हम करीब पांच घंटे तक थाने और अस्पताल के चक्कर लगाते रहे। इसके बाद बेटे की डेडबॉडी मिली।” मुझे सिर्फ न्याय चाहिए आखिर में उन्होंने कहा, “हमारा एक ही बेटा था। उसका 27 जून को जन्मदिन था। वे लोग उसे हमसे छीनकर ले गए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आरोपियों को आसानी से बेल मिल जाए और सालों तक केस चलता रहे। मुझे सिर्फ न्याय चाहिए।”
‘बेटे का जन्मदिन था, हम शोकसभा मना रहे’:गुरुग्राम के इवेंट मैनेजर को थार ने कुचला, पिता बोले- महंगा हेलमेट भी जान नहीं बचा पाया
