सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एक वकील ने हंगामा किया। सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहे और फाइल भी फेंकी। इस दौरान सीजेआई कोर्ट रूम में मौजूद नहीं थे। यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन, जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई। हंगामे के बाद कोर्ट के आदेश पर सिक्योरिटी ने वकील को तुरंत बाहर निकाल दिया। जब उस याचिकाकर्ता वकील ने अभद्रता शुरू की, तब कोर्ट रूम में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। दिल्ली पुलिस वकील को पूछताछ के लिए ले गई है। कोर्ट रूम में हुए हंगामे की 2 तस्वीरें… जज बोले- वकील से सहानुभूति, पूरा मामला समझें… कोर्ट ने नहीं लिया एक्शन, लेकिन बार काउंसिल कर सकता है कार्रवाई इस वकील के खिलाफ बार काउंसिल भी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, अगर कोई वकील अपने पेशे के नियमों का पालन नहीं करता या गलत आचरण करता है, तो उसके खिलाफ एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत कार्रवाई हो सकती है। पहले शुरुआती जांच होती है, अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उसे बार काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के पास भेजा जाएगा। वकील दोषी मिला तो उसे चेतावनी दी जा सकती है, कुछ समय के लिए वकालत करने से रोका जा सकता है। उसका नाम बार काउंसिल की सूची से हटाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता के मामले सुप्रीम कोर्ट में कभी-कभार किसी वकील द्वारा बहस के दौरान ऊंची आवाज, तीखी बहस या अनुचित टिप्पणी के मामले सामने आए हैं, लेकिन CJI पर शारीरिक हमला या कोर्ट रूम के अंदर गंभीर अभद्रता जैसी घटनाएं सार्वजनिक रिकॉर्ड में मिलती ही नहीं हैं। CJI से अभद्रता की अबतक केवल 2 घटनाओं का जिक्र मिलता है… एक वकील ने सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई की ओर जूता फेंका और नारे लगाए। जूता CJI को नहीं लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद बार काउंसिल ने भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। बाहर जाते वक्त वकील ने नारा लगाया- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। घटना के बाद CJI ने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता। पढ़ें पूरी खबर… ————————- ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक:ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे, इससे न्याय व्यवस्था को नुकसान; NCLT का फैसला रद्द नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पढ़ें पूरी खबर…
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