नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी दिल्ली के 92 कॉलोनियों को ‘ओ (O)-जोन’ से हटाने की दिशा में प्रयासरत है। शुक्रवार को दक्षिण दिल्ली से भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने दिल्ली की 92 कॉलोनियों को ‘ओ-जोन’ से हटाने के लिए शुरू किए गए अभियान को लेकर शुक्रवार को सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात की। सांसद रामवीर सिंह ने कहा इन कॉलोनियों को 2008 में नियमित किया जा चुका है। अब इन्हें ओ-जोन से हटाया जाए, ताकि यहां के लोगों को भी मालिकाना हक मिल सके। इससे इस ओ-जोन में रहने वाले 15 लाख लोग प्रभावित है। सीएम ने इस मामले में केंद्र सरकार तथा डीडीए से बात करने का आश्वासन दिया है। मई 2008 में नियमित की गई थी कॉलोनियां बिधूड़ी ने बताया दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र में बदरपुर विधानसभा क्षेत्र के 3 वार्ड- मीठापुर, जैतपुर और हरिनगर में 45 कालोनियां हैं। इसके अलावा नई दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली संसदीय क्षेत्रों में भी ऐसी कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों को 24 मई 2008 को दिल्ली और केंद्र सरकार ने नियमित कर दिया था। सरकार ने यहां की आरडब्ल्यूए को प्रोविजनल रेगुलराइजेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर दिए थे, लेकिन फिर अचानक ही 8 मार्च 2010 को इन कॉलोनियों को दिल्ली और केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने एफ जोन से ओ-जोन में डाल दिया। जब यहां के लोगों ने इस पर विरोध जताया तो 28 सितंबर 2013 को डीडीए ने इन कॉलोनियों को वापस एफ-जोन में डालने का नोटिस जारी किया, लेकिन एनजीटी में एक मामला लंबित होने के कारण इस आदेश पर रोक लगा दी गई। 2015 में इन कॉलोनियों पर फैसला नहीं हो पाया बिधूड़ी ने कहा वह मामला 2015 में समाप्त हो गया था, लेकिन इन कॉलोनियों पर फैसला नहीं हो पाया। यहां तक कि डीडीए द्वारा बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी ने भी कॉलोनियों के पक्ष में ही फैसला दिया। एक्सपर्ट कमेटी ने कहा कि इन कॉलोनियों से यमुना के पानी की गुणवत्ता या नदी के बहाव पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता। बिधूड़ी ने सीएम को बताया इन कॉलोनियों को ओ-जोन से हटाने के लिए डीडीए ने 28 सितंबर 2013 को जो नोटिस जारी किया था, उसका नोटिफिकेशन जारी किया जाए, ताकि इन कॉलोनियों के लोगों को भी उसी तरह मालिकाना हक मिल सके, जैसे सरकार द्वारा हाल ही में मंजूर की गई कॉलोनियों में दिया जा रहा है। ये सभी कॉलोनियां खेतीबाड़ी की निजी जमीन पर बनी हुई हैं और इनमें 15 लाख से अधिक लोग रहते हैं।
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