कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि पीएम ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए थे। यह नियमों के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने लिखा कि पीएम ने करीब 29 मिनट के संबोधन में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाया। सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सवाल उठाए। उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की। कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। स्पीकर को लिखे लेटर की चार मुख्य बातें… जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार संबोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा। PM ने कहा था- विपक्ष ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी पीएम नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को देश को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके जैसे विपक्षी दल इस भ्रूणहत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं। नारी शक्ति के अपराधी हैं। जिन लोगों ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी। दरअसल, लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका था। बिल में लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। क्या है विशेषाधिकार हनन? संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है। ————— ये खबर भी पढ़ें… लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। पूरी खबर पढ़ें…
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