केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं छात्र अब 1 जून से री-इवैल्यूएशन और आंसर-शीट की स्कैन कॉपी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर पाएंगे। बोर्ड ने शुक्रवार को तारीख बढ़ाने का ऐलान किया। बोर्ड ने 19 मई से यह प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन आवेदन संख्या ज्यादा होने के कारण वेबसाइट क्रैश हो रही थी। इसके बाद तारीख बढ़ाकर 25 मई तक कर दी थी। स्टूडेंट्स को री-इवैल्यूएशन के दौरान पोर्टल पर सर्वर डाउन, पेमेंट फेल होने और ब्लर पेज जैसी तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं। स्टूडेंट्स की शिकायत के बाद CBSE ने पोर्टल पर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन प्रक्रिया को बंद कर दिया था। बोर्ड का कहना है कि वह पोर्टल को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, ताकि छात्रों को आवेदन करते समय परेशानी का सामना न करना पड़े। इस बार 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपी दोबारा जांचने यानी री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया। स्टूडेंट्स ने शेयर कीं आंसर-शीट की स्कैन कॉपी री-इवैल्युएशन के लिए 3 घंटे में ही 1.26 लाख आवेदन आए थे CBSE ने इस साल पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया है। कई स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स ने OSM पर सवाल उठाते हुए शिकायत की थी कि इससे नंबर कम आए हैं। इसके बाद बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स ने री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया था। री-इवैल्युएशन के लिए शुरुआती 3 घंटे में ही करीब 1.26 लाख आवेदन आए थे। सीबीएसई ने इसका डेटा अपडेट करना बंद कर दिया था। हालांकि बोर्ड ने दावा किया था कि लाखों छात्रों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी थी और ज्यादातर छात्रों को कॉपियां भेज दी गई हैं। 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच CBSE 12वीं के एग्जाम में 17.68 लाख छात्र बैठे। रिजल्ट आया तो, पिछली बार के 88.39% मुकाबले इस बार 85.2% स्टूडेंट्स ही पास हुए। बोर्ड एग्जाम देने वाले 22% यानी 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपी दोबारा जांचने यानी री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया है। राहुल बोले- मोदी सरकार को छात्रों के भविष्य नहीं, सत्ता बचाने की चिंता CBSE ने कहा- OSM सटीक; हैदराबाद की कंपनी को ठेका CBSE का कहना है कि इससे चेकिंग ज्यादा तेज और सटीक ढंग से होती है और मार्क्स जोड़ने या डेटा एंट्री में होने वाली गड़बड़ियों में कमी आती है। रिजल्ट के बाद उलटा हुआ। स्टूडेंट्स ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल होने और ब्लर पेज जैसी शिकायतें कीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, CBSE ने हैदराबाद की कंपनी Coempt Edutech प्राइवेट लिमिटेड को OSM के जरिए 12वीं के बोर्ड की कॉपी चेक करने का ठेका दिया था। ये फर्म तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों मे डिजिटल इवैल्यूएशन का काम करती है। 2019 में इसका नाम ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड था। तब इस पर तेलंगाना में 12वीं के बोर्ड एग्जाम में डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। उस साल राज्य में 9.74 लाख में से 3 लाख से ज्यादा बच्चे फेल हो गए थे। 28 मई को धर्मेंद्र प्रधान ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बात मानी और कहा कि हर शिकायत का समाधान किया जाएगा। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पेरेंट्स, 9वीं क्लास में लागू किए जाने का विरोध CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट में 19 लोगों के एक ग्रुप ने चुनौती दी। इनमें स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स शामिल हैं। ये याचिका क्लास 9वीं में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू किए जाने के विरोध दायर की गई। इसके खिलाफ SC अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। पूरी खबर पढ़ें…
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