दिव्यांगों पर टिप्पणी- कॉमेडियन समय रैना समेत 5 पर जुर्माना:सुप्रीम कोर्ट बोला- हमने आजादी दी ताकि सुधरें पर कुछ नहीं हुआ, हमें गुमराह किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया, विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर, निशांत जगदीश तंवर पर 3 लाख रुपए जुर्माना लगाया है। अदालत ने दिव्यांगों पर विवादित टिप्पणी के केस में यह आदेश दिया है। इसकी सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की। बेंच ने कहा कि हमारे आदेश के बावजूद रैना ने अपने शो पर किसी दिव्यांग को नहीं बुलाया। अदालत ने कहा- हमें लगता है कि रैना ने अदालत को गुमराह किया और हमारे आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया। हम उन पर जुर्माना लगाते हैं, जिसे 2 हफ्ते में जमा करना होगा। अदालत क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रैना के शो पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के इलाज के खर्च पर असंवेदनशील टिप्पणी करने और दिव्यांगों का मजाक उड़ाने का आरोप है। फाउंडेशन की वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि रैना ने अपने किसी भी शो में शामिल होने के लिए उनसे या किसी अन्य दिव्यांगजन से कभी संपर्क नहीं किया। दिव्यांग की गरिमा के उल्लंघन का आरोप, कोर्ट के निर्देश याचिकाकर्ता और रैना की दलील रैना के वकील ने कहा कि शो के जरिए हमने 9 लाख रुपए का फंड जुटाया है। दिव्यांगों को बुलाया गया था। शो पर उनकी फोटो भी थी। अगर दिव्यांग संस्था की वकील अपराजिता के क्लाइंट तक हम नहीं पहुंच पाए तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दिव्यांग संस्था की वकील अपराजिता सिंह ने कहा- हमें उनसे पैसे नहीं चाहिए। यह अहंकार है और हम इसके सामने नहीं झुकेंगे। इस पर समय के वकील ने कहा कि यह घमंड नहीं है। सुप्रीम कोर्ट बोला- आजादी दी ताकि सुधरें CJI सूर्यकांत ने कहा- एक कलाकार के रूप में आप सार्वजनिक जीवन में होते हैं। यहां आप जितना ज्यादा दूसरों का सम्मान करते हैं, उतना ही ज्यादा आपका इन्वेस्टमेंट होता है। हमने लंबे समय तक इन्हें आजादी दी। हमें लगा कि ये अच्छे घर के लड़के हैं और यह सुधार लाएंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। हम जुर्माना लगाते हैं और अगर इसे नहीं भरा तो बढ़ाकर 30 लाख कर देंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर आप अपने तौर-तरीकों को सुधारना या समाज के सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानते हैं, तो आपको इसके नतीजे भुगतने होंगे। सॉलिसिटर जनरल बोले- युवाओं के पास उनसे बेहतर यूथ आइकॉन सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- हाल ही में, रैना ने एक नया शो शुरू किया जिसमें उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सिस्टम का मजाक उड़ाया। उन्होंने शुरुआत में कहा, ‘मैं कुछ ऐसा कर रहा हूं जो मैंने पिछली सीरीज में नहीं किया था।’ तुषार मेहता बोले- “वे नींबू-मिर्च लटकाते हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ दिख रहा था। मैं इस मामले में पड़ना नहीं चाहता था, लेकिन अगर रैना SMA फाउंडेशन या पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया है, तो यह उनके अहंकार को दिखाता है।” 2025 में शो के दौरान रणवीर के कमेंट से शुरू हुआ विवाद फरवरी 2025 में रणवीर अलाहाबादिया समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट में बतौर गेस्ट जज पहुंचे। उन्होंने एक प्रतियोगी से माता-पिता के यौन संबंधों से जुड़ा बेहद आपत्तिजनक सवाल पूछा। इस क्लिप के वायरल होने के बाद पूरे देश में भारी विरोध शुरू हो गया। इसके बाद महाराष्ट्र और असम समेत कई राज्यों में FIR दर्ज हुई। शिकायतों में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य पैनलिस्टों के नाम शामिल किए गए। आरोप लगाए गए कि शो में अश्लील और अभद्र सामग्री परोसी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता असीमित नहीं है। सार्वजनिक मंच पर शालीनता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। कुछ युवा खुद को “बहुत ओवरस्मार्ट” समझते हैं। भास्कर नॉलेज दिव्यांगों का मजाक… कानून क्या कहता है? भारत में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 दिव्यांग लोगों की गरिमा, समानता और भेदभाव से सुरक्षा की गारंटी देता है। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। इसलिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसा मजाक, जो दिव्यांगों का अपमान करे या उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाए, कानूनी जांच और न्यायिक कार्रवाई के दायरे में आता है। क्या ऑनलाइन कॉमेडी के लिए नए नियम बन सकते हैं? याचिका में मांग की गई है कि दिव्यांगों की गरिमा का उल्लंघन करने वाले ऑनलाइन कंटेंट पर स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए। फिलहाल भारत में ऐसा कोई नियम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट गाइडलाइंस और सजा का प्रावधान तय करे।

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