नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में सुरक्षाकर्मियों के शोषण और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें विश्वविद्यालय में नवनियुक्त निजी सुरक्षा एजेंसी ‘ईए सिक्युरिटास’ का एक प्रतिनिधि सुरक्षा गार्डों से नौकरी जारी रखने के एवज में खुलेआम रिश्वत लेते दिख रहा है। पीड़ित सुरक्षा गार्डों का आरोप है कि ठेकेदार बदलने के बाद उन्हें नौकरी पर बनाए रखने के लिए 30 से 40 हजार रुपए तक की नकदी जमा करने को कहा गया। हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनी ने दस्तावेज और पैसे जमा करने के लिए आधिकारिक दफ्तर के बजाय बाहरी इलाके कटवारिया सराय में गुप्त ठिकाना बनाया था। इस मनमानी और अवैध वसूली के खिलाफ करीब 370 प्रभावित सुरक्षा गार्डों ने हस्ताक्षर कर जेएनयू के रजिस्ट्रार को अपनी शिकायत सौंपी है। ठेकेदार बदलते ही लूटा जा रहा ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू) ने भी इस मामले को केंद्रीय उप श्रम आयुक्त के सामने उठाया है। यूनियन का कहना है कि इनमें से अधिकांश गार्ड पिछले 10 से 12 वर्षों से विवि में संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन ठेकेदार बदलते ही गरीब कर्मचारियों को धमकी देकर लूटा जा रहा है। प्रशासन से जांच करने की मांग जेएनयू प्रशासन और नई सुरक्षा कंपनी की मिलीभगत से यह उगाही रैकेट चल रहा है। गरीब कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर घूस ली जा रही है। प्रशासन तुरंत इस भ्रष्ट नेटवर्क पर जांच बैठाए और पुराने कर्मचारियों को रोजगार की गारंटी दे।
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